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Life Thinking

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रविवार, 3 सितंबर 2023

परिवार का मुखिया या स्वयं निर्णायक ( सामाजिक एवं पारिवारिक) - लेख

मनुष्य जीवन में परिवार का मुखिया परिवार को चलाने वाला चालाक एवं इंजन का काम करता है। तथा परिवार रूपी डिब्बे होते हैं 
जिसे चलाने के लिए शारीरिक एवं मानसिक कार्य की प्रक्रिया से परिवार के मुखिया को गुजरना पड़ता है। क्योंकि वह इंजन और चालक दोनों का काम करता है।
बह हमेशा तथा इंजन तथा इंजन से जुड़े डिब्बो को सही दिशा या सही रास्ता दिखाने का कार्य करता है। हमेशा वह आर्थिक एवं सामाजिक परंपरा की स्थितियों का आकलन। या किसी भी स्थिति में धन उपार्जन करना एवं समाज के प्रति जो कार्यों होते हैं उनका का पालन। तथा कठिन परिस्थितियों में स्वयं तथा पारिवारिक सदस्यों को धेर्य बनाकर रखना। जो की हर समय शारीरिक एवं मानसिक कठिनाइयों से होकर गुजरना पड़ता है। जो की एक चुनौतियां पूर्ण जीवन होता हे। जीवन को सही राहे एवं सही दिशा देने के लिऐ। परिवार के सभी सदस्यों से
कोई भी या अन्य कार्य करने से पहले सहमति एवं सही राय लेकर ही कार्य को आगे बढ़ना चाहिए। जिससे कि कार्य को सही दिशा मिल सके। क्योंकि उसमें अलग-अलग आत्मज्ञान का प्रयोग होता है। जो व्यक्ति या जो मुखिया अविवेकपूर्ण या जल्दबाजी में कोई  निर्णय
लेता है। वह कभी भी सफल कार्य को सही रूप नहीं दे पता है । बह स्वयं तथा पारिवारिक लोगों को आर्थिक या सामाजिक स्थिति को गलत मोड़ दे देता है। जिसके चक्रव्यूह से निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है। या आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को हानि पहुंचा देता है।
              
                                  लेखक - रमेश बाबू


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