मनुष्य जीवन में जीने के लिए केवल एक मात्र योग्य विश्वास माना जाता है! जो कि स्वयं के द्वारा किया गया हो या दूसरे के द्वारा दूसरे व्यक्ति द्वारा दी गई आशा हो। जो की कल्याणकारी भावना से या स्वयं का स्वार्थ सिद्ध करने के लिए प्रयोग में ली गई। लेकिन व्यक्तित्व की पहचान उसे समय की जाती है। जब उसे व्यक्ति को आर्थिक या सामाजिक आवश्यकता की जरूरत पड़ती है। जिसकी पहचान स्वयं समय आने पर मालूम पड़ जाती है। जब काल अवधि या समय पूर्ण होने पर। लेकिन यहां पर मैं एक बात बताना चाहता हूं कि हर व्यक्ति को एक ही समान दृष्टि से नहीं देखना चाहिए या एक व्यक्ति गलत है तो सभी को गलत नहीं ठहराना जा सकता ।
तात्पर्य- स्वयं के द्वारा दी गई या मनुष्य के द्वारा दी गई अवधि का पूर्ण हो जाने पर। उनके आदर्शों को पहचान करना।
या
- स्वयं व्यक्ति दूसरे को आदर्श मानकर उनका सम्मान कर आदर्श को अपना कर उनका महत्व देता है।
लेकिन कहते हैं कि - समय हर तकलीफों का अंत एवं हर व्यक्ति की पहचान बता देता है।
लेखक- रमेशबाबू
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