जैसे - मां-पिता का एक बच्चे की तरफ ध्यान देना !
या दूसरे बच्चों को स्नेह , प्रेम व्यवहार से वंचित करना !
या बच्चे, बच्चियों में अंतर के आधार पर व्यवहार करना । क्योंकि उनका भी अपना अलग ही अस्तित्व है। जिनके बिना हमारा जीवन भी नाम मात्र का है
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