- दृष्टि कर्ता कौन - प्रकृति द्वारा दिए गए शरीर या जीव का निर्माण बिना किसी कारण से नहीं होता। इस प्रकार बिना किसी कारण से किसी जीव की मृत्यु हुई नहीं होती है। किंतु जीवन काल पूर्ण किए बिना मृत्यु होना । कुछ हद तक मनुष्य स्वयं भी जिम्मेदार होता है। बह अपने शरीर की इंद्रियों पर नियंत्रण नहीं होना तथा मनुज तन को गलत उपयोग में लगाना। कहते हैं? कि तन हमारा मंदिर है तो मन( आत्मा) हमारा भगवान है। जिसकी देख - रेख जिस तरह मनुष्य करना चाहता है। कर सकता है या बन सकता है। यानी दृष्टि कर्ता मनुष्य स्वयं होता है।
लेखक - रमेशबाबू
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