एवं मनुष्य अपने जीवन में अपनाते हैं। जो स्थाई रूप से अपने कार्य के रूप में प्रयोग करता है। जो कार्य का भाग ने होकर एक तरह की आदत होती है। एवं शारीरिक मानसिक, आर्थिक, एवं सामाजिक परिस्थितियों का उल्लंघन करती है। जिसे सुनने मात्र से ही दूसरे व्यक्ति को ग्लानि सी महसूस करता है। यह एक तरह की मानसिक स्थिति को घर बना लेती। जिससे उससे निकालना या छोड़ना ना के बराबर होता है। लेकिन नामुमकिन भी नहीं होता। शुरू में तो व्यक्ति दूसरे को देखकर अपने शौक के लिए प्रयोग में लाता है। किंतु धीरे-धीरे उसे चीज का या किसी भी अनुप्रयोग कार्य करने का आदी हो जाता है। जिसको न करने पर या उपयोग में नहीं लाने पर। स्वयं को असंतोषजनक महसूस करता है। लेकिन धीरे-धीरे वह अपने मन मे गिन्न सी महसूस भी करता है। शायद इस कार्य या आदत को अपने जीवन में ने अपनाता या करता।
लेखक - रमेशबाबू
Good
जवाब देंहटाएं