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रविवार, 20 अगस्त 2023

नशा या स्वंय का विनाश (लेख)


मनुष्य ने या जिस जीव ने धरती पर जन्म लिया हर चीजों या हर व्यक्ति से उसके व्यवहार या परिणाम से भली-भांति परिचित है।
किंतु देखकर भी अनजान बना रहता है।
जैसे कि किसी हिंसक जीव जंतु के पास जाएंगे तो या तो बह काटेगा या खायेगा। फिर भी देख सोच कर भी अनजान की तरह मौत के मुंह में जाने से वंचित नहीं रहते। कहते है कि- जानबूझकर आफत मोल लेना।
किसी भी तरह का नशा करने वाला व्यक्ति सब कुछ( घर परिवार, मात-पिता स्त्री, बेटा- बेटी) त्याग सकता किंतु अपनी गलत आदतों या नशे का त्याग कभी नहीं करेगा।चाहे उसके परिवार को दो वक्त की रोटी नसीब न
हो।
 नशे को सब कुछ मान चुका होता है।
यह एक तरीका विकार है । जो स्वंय के साथ-साथ से परिवार सहित दुखी रहता है।
जिससे स्वयं की आर्थिक, सामाजिक ,शारीरिक जीवन को कष्ट प्रदान करता है। तथा असमय ही मृत्यु को या दर्दनाक मौत को आमंत्रित करता है।
जिसका खामियाजा(दु:ख) परिवार के सदस्यों को उठाना पड़ता है।पारिवारिक व्यक्ति अपने जीवन को कोसते रहते हैं। कि शायद में उसकी संतान या भाई नहीं होता तो यह जीवन देखने को नहीं पड़ता।
मनुष्य चाहे  जिस तरह अपने जीवन को रहन-सहने स्तर है। 
रख सकता या अच्छा जीवन व्यतीत कर सकता।
क्योंकि सब कुछ पृथ्वी पर आने पर ही व्यक्ति संगति या साथ रहने का भी पड़ता है। यह आप स्वयं पर निर्भर करता है ।  साथ ही उसमें विवेकशील , दिमाग ,मन कंट्रोल रखने की क्षमता ही मनुष्य में सर्वोपरि है । 
                             
                                      लेखक - रमेश बाबू



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