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मंगलवार, 22 अगस्त 2023

बच्चों का बचपन या निर्माण - लेख

सभी माता-पिता को अपने जीवन बच्चों का इंतजार रहता है। या आते हैं। जिससे उन्हें खुशी या गर्व महसूस करते हैं। जिससे उन्हें यह अपने बच्चों से भविष्य में बहुत आशा रहती है। या रखते हैं।
साथ ही अपने बच्चों का जीवन सुधारने के लिए सब कुछ करते हैं। या करते रहते हैं।
जिससे कि स्वयं से ज्यादा सामाजिक आर्थिक स्थिति में हमेशा आगे रहे।
लेकिन इन सब मैं  माता-पिता स्वयं अहम भूमिका निभाते है। कि बच्चों का भविष्य किस तरह रखना है ।या कैसा रखना है। जिस अगर किसी नये मकान का निर्माण किया जाए तो उसकी आधारशिला नींब पर ही निर्भर करती है। उसी प्रकार जो संस्कार या गुण बच्चों में बचपन से या बचपन में अंकुरित किया जाता है।
वही संस्कार धीरे-धीरे विकसित होते चले जाते हैं। जो एक भविष्य की आधारशिला बन जाता है। या दिखाई देते हैं।
जिस तरह गीली  मिट्टी से कुम्हार या बनाने वाला जो चाहे उसका रूप, आकार दे सकता है।
मिट्टी से बनी वस्तुओं को अगर पका दिया जाये।
उसमें कोई भी संशोधन नहीं किया जा सकता है।
संशोधन या परिवर्तन करने पर मिट्टी से बनी वस्तुएं टूट जाती है। उसी प्रकार बच्चों के जवान या बड़े होने पर संस्कार या गुणों का संशोधन नहीं किया जा सकता है। या करने पर रूस्ट हो जाते या दुखी हो जाते हैं।

                                     लेखक - रमेश बाबू

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