लेकिन इस संसार में बहुते ऐसे व्यक्ति है ।जो दूसरे व्यक्ति से चीज वस्तु या आर्थिक मदद मांगने से अपने आप में शर्मिंदगी या झिझकते हे।
जैसे- श्याम कोई चीज या वस्तु देगा या नहीं देगा शायद उसके पास होगी या नहीं होगी। या वह मना करने पर और व्यक्तियों के सामने मेरे को शर्मिंदा होना पड़ेगा। यही विचार करने पर वे दूसरे व्यक्ति के पास जाने से कतराता रहेगा। या अपनी बात नहीं रख पाता।
लेकिन बह यह नहीं समझता है। कि - श्याम के मना करने पर श्याम के पास खड़े व्यक्ति भी किसी भी वस्तु या चीज को मांगने से पहले स्पष्ट रूप से उनके सामने बात को रखना चाहिए ताकि वे स्वयं भी उसे बात को सक्रिय भाव से ले और मदद कर सके।
जिससे भौतिक संसाधन या आर्थिक की कमी के कारण कार्य में दिन - प्रतिदिन उसके कार्य में बाधाये आती ही रहयेगी। ने की बाधाओ की कमी होगी।
लेखक - रमेशबाबू
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