https://rameshbaba7568.blogspot.com/sitemap.xml google-site-verification=kmYBgHhvuQYehft3SXRCNzxbwQDUmaBHZ5DthL_AOrA https://rameshbabu7568.blogspot.com/2024/01/blog-post.html google.com, pub-8003236985543245, DIRECT, f08c47fec0942fa0 life thinking: शुभ - अशुभ क्यों कब कैसे?

Life Thinking

rameshbabu7568.blogspot.com

सोमवार, 13 अक्टूबर 2025

शुभ - अशुभ क्यों कब कैसे?

मनुष्य अपने जीवन मे कार्यों की शुरुआत करने से पहले शुभ - अशुभ( दिन, समय) आदि को ध्यान में रखकर आगे बढ़ता है। ताकि किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े। और कार्य पूर्ण रूप से चला रहे या समाप्त हो जाए।
Ad

🌞 १. शुभ और अशुभ क्या है?

शुभ का अर्थ होता है — कल्याणकारी, सद्बुद्धि से युक्त, सकारात्मक फल देने वाला कार्य या विचार।
अशुभ का अर्थ है — हानिकारक, दुर्भावनापूर्ण या नकारात्मक परिणाम देने वाला कार्य या विचार।

👉 उदाहरण:

किसी की सहायता करना — शुभ

किसी को हानि पहुँचाना — अशुभ


इस प्रकार शुभ-अशुभ कोई बाहरी शक्ति नहीं, बल्कि हमारे कर्मों, विचारों और भावनाओं का परिणाम है।
---

🌗 २. शुभ-अशुभ कब और क्यों आता है?

यह हमारे कर्मों (Actions) और विचारों (Intentions) से जुड़ा है।

(क) जब हमारा मन सद्भावना, ईमानदारी और सत्य मार्ग पर चलता है,
तो शुभ फल प्राप्त होता है।

(ख) जब मन लोभ, ईर्ष्या, द्वेष या स्वार्थ से भर जाता है,
तो अशुभ परिणाम सामने आता है।

👉 यह उसी तरह है जैसे हम बीज जैसा बोते हैं, वैसा फल पाते हैं।
यदि बीज अच्छा है (सद्कर्म), तो वृक्ष भी फलदायी होगा (शुभ फल)।
---

🔥 ३. शुभ-अशुभ कैसे होता है? (कारण और प्रभाव)

शुभ-अशुभ कोई जादू नहीं — यह प्रकृति का नैतिक नियम (Law of Karma) है।

विचार → कर्म → फल
जब विचार शुभ होंगे, कर्म भी शुभ होंगे, और परिणाम भी सुखद होगा।
जब विचार अशुभ होंगे, कर्म भी गलत होंगे, और फल दुखद होगा।
Ad


👉 इसीलिए कहा गया है —

> “जैसा कर्म करेगा, वैसा फल मिलेगा।”

---

🌺 निष्कर्ष:

शुभ-अशुभ हमारे मन की दशा और कर्म की दिशा पर निर्भर करता है।
जो व्यक्ति सत्य, प्रेम, धैर्य और करुणा के मार्ग पर चलता है,
उसके जीवन में शुभ समय और शुभ फल स्वतः आने लगते हैं।
और जो व्यक्ति अहंकार, लोभ, ईर्ष्या या अन्याय में लिप्त रहता है,
उसके लिए अशुभ परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं।


लेखक - रमेशबाबू


 





कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

rameshbabu7568@gmail.com

कहानी - मतलबी दुनिया

स्वयं पर विश्वास क्यों?

स्वयं पर इतना विश्वास रखो कि तुम जिस कार्य को करने का निश्चय करते हो, उसे पूर्ण करके ही छोड़ो। क्योंकि जीवन में सबसे बड़ी शक्ति ...

कहानी = मतलबी दुनिया नारी विशेष