वह दिन-रात धन अर्जित करने में लगा रहता है, परंतु यह नहीं सोचता कि यह धन तभी सार्थक है जब शरीर स्वस्थ और मन शांत हो। रुपया-पैसा या धन-दौलत जीवन के क्षणों को वापस नहीं ला सकते। जवानी बीत जाने के बाद पछतावा करने से कुछ भी हासिल नहीं होता।
वास्तव में दीर्घायु का रहस्य केवल लंबा जीवन जीना नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और शांत जीवन जीना है। जो व्यक्ति संयम, नियमित दिनचर्या, सादगी, और सच्चाई से जीवन व्यतीत करता है, वही वास्तव में दीर्घायु कहलाता है।
इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह धन के पीछे भागने के बजाय अपने तन, मन और आत्मा की शुद्धता पर ध्यान दे। क्योंकि जब मन प्रसन्न होता है और शरीर स्वस्थ, तभी जीवन वास्तव में दीर्घ और सुखमय बनता है।
''मेरे विचार''
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