अर्जुन तुरंत पास के पेड़ पर चढ़ गया और अपनी जान बचा ली। लेकिन विक्रम पेड़ पर चढ़ना नहीं जानता था। उसने डर के मारे ज़मीन पर लेटकर साँस रोक ली और मरने का नाटक करने लगा।
भालू उसके पास आया, सूँघा और यह सोचकर चला गया कि शायद वह मर चुका है।
भालू के जाते ही अर्जुन नीचे उतर आया और हँसते हुए बोला:
"भालू तुम्हारे कान में क्या कह रहा था?"A
विक्रम ने गंभीरता से जवाब दिया:
"भालू यही कह रहा था कि सच्चा दोस्त कभी मुसीबत में अपने मित्र को अकेला छोड़कर भागता नहीं है।"
सीख:
इंसान अक्सर स्वार्थ में आकर अपना ही हित देखता है, लेकिन सच्ची इंसानियत और दोस्ती वही है जिसमें हम दूसरे के लिए भी सोचें। स्वार्थ असली रिश्तों की
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