जीवन में ज्यादातर कार्य ऐसे होते हैं जो दूसरे के सहयोग द्वारा पूर्ण नहीं किया जा सकते हैं। जिनको पूर्ण करने के लिए एक साझेदार बनाया जाता है। जीवन भर के लिए या कुछ समय के लिए जिसे पार्टनर या जीवनसाथी दर्जा दिया जाता है। जिस कार्य के लिए चुना जाता है।
उससे संबंधित विभिन्न गतिविधियों की पहले जांच पड़ताल करता है। कि यह इस योग्य है या नहीं। किंतु उसे समय उसमें किसी तरह की खामियां नहीं पाने पर उसे पार्टनर के रूप में चुन लिया जाता है। किंतु यह भी परम सत्य है। कि उस समय किसी तरह के विकार कम ही उत्पन्न होते हैं। लेकिन समय के चलते किस पार्टनर में कौन सा विकार मन में घर कर ले यह किसी को पता नहीं रहता। लेकिन इसमें अहम जो महत्वपूर्ण बात आती बह हे। दीमक रूपी संदेह(भ्रम) कभी एक तो कभी दूसरी तरफ से लगना शुरू हो जाए तो। उसे रिश्ते को खोखला( तोड़कर) कर ही दम लेती है। जिसका कोई इलाज नहीं है।
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फिर भी इसके कहीं कारण हो सकते हैं जो नीचे दिए गऐं।
🔹 1. विश्वास की कमी (Lack of Trust)
अगर रिश्ते की शुरुआत से ही भरोसे की नींव मजबूत नहीं होती, तो छोटी-छोटी बातें भी शक का कारण बन जाती हैं।
उदाहरण:
– पार्टनर फोन छिपाकर रखे।
– बातचीत या व्यवहार में बदलाव आए।
– समय पर जवाब न देना या झूठ बोलना।
🔹 2. पिछले अनुभव (Past Experiences)
अगर पहले किसी रिश्ते में धोखा मिला हो, तो मन में डर बैठ जाता है और वही संदेह अब के रिश्ते में झलकने लगता है।
🔹 3. तीसरे व्यक्ति का हस्तक्षेप (Influence of Others)
कभी-कभी दोस्त, रिश्तेदार या आसपास के लोग किसी के बारे में गलत बातें कहकर दिमाग में शक पैदा कर देते हैं।
🔹 4. कम संवाद (Lack of Communication)
जब पार्टनर खुलकर बात नहीं करते, अपने मन की बातें नहीं साझा करते — तब मन में सवाल उठने लगते हैं।
🔹 5. अत्यधिक लगाव या अधिकार भावना (Possessiveness)
जब कोई व्यक्ति अपने पार्टनर पर ज़्यादा नियंत्रण रखना चाहता है, तो ज़रा सी दूरी या बदलाव भी उसे धोखे जैसा लगता है।
🔹 6. आत्मविश्वास की कमी (Insecurity)
कुछ लोग खुद को कम आंकते हैं — उन्हें डर रहता है कि उनका साथी किसी और से बेहतर व्यक्ति के साथ चला न जाए।
🔹 7. सोशल मीडिया और तकनीक का असर
मोबाइल, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म ने लोगों के बीच पारदर्शिता घटा दी है। “किससे बात कर रहा है?” या “लास्ट सीन कब था?” जैसे सवाल शक को जन्म देते हैं।
🔹 8. प्यार में अत्यधिक अपेक्षा
जब कोई व्यक्ति अपने पार्टनर से ज़रूरत से ज़्यादा उम्मीद रखता है और वे पूरी नहीं होतीं, तो मन में शंका घर करने लगती है।
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'' मेरे विचार''
लेखक - रमेशबाबू
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