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शुक्रवार, 10 नवंबर 2023

कहानी- राज़ एक दास्तां

अपने दोस्त के यहां कुछ निमंत्रण क्या था ? जो की डाक पत्र द्वारा मिला था। मेरा सहपाटी पास वाले गांंव में रहता था। साथ ही नेक दिल का था।
लेकिन मुझे पता था कि उसकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब है! साथ  ही गरीब होने के कारण उनकी या उसकी शादी नहीं हो पा रही थी । मां पिता बचपन से ही गुजर गए थे ।क्यों नहीं उनका पता लगाए जाएगी?
की आर्थिक हालात के अलावा इनकी मनोबल विशेषताएं देखी जाए।
हालांकि मेरे दोस्तों ने उनके बारे में बहुत कुछ अलग सोचा था । क्यों नहीं इस बात का अलग से ही सोचा जाए। क्या पता लगाया जाए ।
यही विचार करके अपने आप को समझाते हुए अपने दोस्त के यहां पहुंच चुका था।
एक तरफ उनकी माली हालत देखकर ।
कुछ अलग से ही विचार मेरे मन में या मैं सोच रहा था।
लेकिन मेरे को उससे कुछ अलग ही सोचकर विचार देखने को मिले।
शहर से गांव तक का लंबा सफर होने के कारण मैं थोड़ा थकान महसूस कर रहा था।
गांव पहुंचने पर अपने दोस्त के घर पर बिजी चारपाई पर मैं बैठ गया था।
कुछ बच्चे मैदान में खेल रहे थे 
क्यों न  कुछ श्याम के बारे में पूछा जाए
मेरे पहुंचने पर बच्चे ने जवाब दिया कि 
श्याम काक
अभी बाजार गए हैं 
मैंने पूछा क्या लेने गए।।
बच्चे ने उत्तर दिया कि।
उनके परम मित्र आने वाले हैं।
जो कि।
उनके लिये।
कुछ लाने वाले हैं।
मैंने सोचा कि मेरे पास सब कुछ है क्या लाएये। वह

हो सकता है।
बह
कुछ मिठाईयां या फल फ्रूट लेने गया होगा।
मैं कुछ समय इंतजार कर कर।
वापिस।
थकान होने के कारण।
शाम की खटिया पर लेट गया क्योंकि।
यही सोच रहा था कि।
हालांकि मैं खुद आत्म स्वाभिमान।
होने के कारण किसी दूसरे के पास नहीं जाता था।
लेकिन मेरी आत्मा ने अलग विचार करने के कारण कुछ अलग ही सोच दी थी।
अगले पल मुझे कुछ अलग ही देखने को मिला था कि ।
मेरे माता-पिता को साथ में लिए हुए।
घर पर पहुंच चुका था।
भूली बिसरी बातें मेरे दिमाग से हट चुकी थी।
यह बात मेरे दिमाग में फिर आना शुरू हो गई थी।
मेरा नाम अजीत राय था।
मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान था।
बहुत मन्नते और देवी देवताओं की मन्नतें मांगने पर एक बारिश पैदा हुआ था।
जिससे घर वालों को खुशी और साहरे की आस पैदा होती हुई थी।
पर लिखने- पढ़ने पर मेरे मां बाप ने गांव  से शहर की तरह लिखने पढ़ने भेज दिया था हालांकि । मेरे मां बाप की  आर्थिक हालत बहुत खराब थी लेकिन। उन्होंने जमीन जाय-धात कम होने के कारण भी मेरी पढ़ाई पर विशेष ध्यान।दिया
साथ ही स्वयं दूसरे की मेहनत मजदूरी कर कर मेरी पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया और मेरा मनोबल भी कम नहीं था। मैं सभी पढ़ाई हूं मैं विशेष ध्यान देते हुए बीए( आर्ट्स कॉमर्स ) फाइनल पास कर लिया । और मेरा नंबर सेकंड ग्रेड टीचर में सिलेक्शन हो गया।
जिससे  मेरे मां - पिता को खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
और मेरी ड्यूटी कहीं बाहर लग गई हालांकि मैं अपने माता-पिता को टाइम टू टाइम पोस्ट के द्वारा अपनी खबर भेज ता राहा।
लेकिन वो कहते हैं कि प्यार किसी को बताकर नहीं आता ।
मैं जो अपने मकान के पास में रहने वाली ।
सरदा जो कि कुछ b.a. फाइनल कर रही ।
मेरे से हर रोज एग्जाम या उससे संबंधित प्रश्नों के बारे में मेरे से पुचती रहते थे कि।
कौन से प्रश्न आएंगे या किस बारे में आएये।धीरे- धीरे
सरदा से मेरा प्यार बढ़ता गया।
और हम दोनों ने लव मैरिज कर ली।
बिना किसी अपने मां- पिता को बताऐ। बिना अलग से ही दुनिया बसा ली।
नही मां-पिता की खबर लेता था। और बहुत दिनों से अपने गांव भी नहीं गया था।
मां- पिता अपना जैसे तैसे गुजारा चला रहे ।थे
एक रोज अजीत राय के पिता श्याम से मिलने आए तो श्याम ने पूरी बात उनके पिताजी को बताई।
 श्याम ने कहा काका आज अजीत राय यानि मेरे परम मित्र आने वाले आप दोनों मेरे साथ चलिये।
मां-पिता की हालत और उनको सामने देखकर मेरी आंखें भर आई । मां- बाप बच्चों के लिए इसलिए पढ़ाते-लिखाते और खुद सब कुछ सहन करते रहते हैं। अपने बच्चों के लिये ताकि उनका ख्याल रख सके। और बुढ़ापे का सहारा बने। मैं कितना खुदगर्ज निकला।
आंखों से मेरे असुधारा बह निकली। माता- पिता को अपने साथ चलने को कहा। और श्याम को भी धन्यवाद दिया।
शायद श्याम के पास नहीं आता तो। मैं अपने आप को कभी नहीं माफ कर पाता।
    
                   धन्यवाद.......


      लेखक   -  रमेश बाबू









A person cheating -

गुरुवार, 9 नवंबर 2023

बच्चों की सोच मां-पिता पर निर्भर करती है। या बच्चों का भविष्य का निर्माण कर्ता माता- पिता ही हैं।


जहां मनुष्य अपने जीवन को संवारने में तथा अपने परिवार की आर्थिक, सामाजिक स्थिति तथा परिवार को खुश रखनेे का निरंतर प्रयास करता ही रहता हैै। यह सब कुछ करतेेे रहने में यह भी पता नहीं पड़ता है । कि बच्चोंं की बच्चोंं पढ़ाई लिखाई, शादी, विवाह बच्चों के बच्चे जीवन निरंंन्तर ही निकलता चला जाता है । लेकिन कुछ इसमें सीखनेेेेेेेे लायक बात यह है । अपने बच्चों की भविष्य की हर एक व्यक्ति चिंता करता है। या करनेेे लायक भी है ।
लेकिन इससे मात-पिता को सीखने लायक बात यह है। कि - हर एक पिता या मां-बाप अपने बच्चों के भविष्य के लिए करता है। लेकिन 
बच्चों को सुधारने के लिये -  सुधारने के लिए माता-पिता स्वयं जिम्मेदार क्योंकि अपनों से बड़े या पूर्वज कहते है कि=
पूत( पुत्र या पुत्रियां) के गुण  पालना( एक तरह का झूलने वाला झूला) में ही दिख जाते हैं।
लेकिन इसके साथ भी बच्चों में आत्मनिर्भरता तथा स्वयं की जिम्मेदारी को समय तथा समय के विस्तार को भी समझना होगा।
क्योंकि अभी बह स्वयं बच्चे हैं।  लेकिन यह जिम्मेदारी भी या पिता या माता की जिम्मेदारी भी आगे जाकर खुद को भी निभाना है। या स्वयं को निभाना।
यह गुण बचपन से ही आरोपित या समझना होगा।
जिस की काबिलियत हो गुना का निरंतर पीढ़ी दर पीढ़ी
चलता ही रहे ताकि = बेटा बाप बनने से पहले अपनी पीढ़ी में शुद्धिकरण और सुधार ला सके।
क्योंकि बह स्वयं भी में पहले किसी का बेटा था अभी किसी का पिता है । अगर यह क्रिया हर व्यक्ति या पिता अपनाते हैं । तो समस्या परे से बाहर ही रहेगी । अपितु गुणों का विकास  भी संसारी जीवन पर आधारित करता या जीवन के आधार पर निर्भर करता है। 
जिसका आधार बताने योग्य नहीं- वह स्वयं पर या कल्चर आधारित रहता है । जिसको हम से स्वयं या सामाजिक की स्थिति देख रहे हैं।


                                               लेखक - रमेश बाबू

मंगलवार, 7 नवंबर 2023

लक्ष्य - सफलता से दूर क्यों ?

मनुष्य हर एक सफलता पाने की इच्छा रखता है। जो कि रखना भी जरूरी है। लेकिन जितनी बड़ी इच्छा रहती है। उतना ही बड़ा जोखिम या परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एवं शारीरिक, मानसिक बे आर्थिक परिस्थितियों को अनुकूल बनाकर चलना पड़ता है । किंतु मनुष्य जोखिम या रिक्स भी नहीं लेना चाहता है।तथा उसे कार्य को सफलता की दृष्टि से देखता रहता है। जो संभव नहीं है। जिस तरह पका हुआ आम खाने की इच्छा रखते हैं। तो पहले पौधे को अनुकूलित वातावरण चारों तरफ पौधे के लिए सुरक्षा कवच अपनी देखरेख एवं बड़ा होने पर फल एवं पकने का इंतजार करना बहुत जरूरी है। उसी तरह जिस कार्य को हम करते हैं। या करने वाले होते हैं। उसका तुरंत परिणाम या मिलने की इच्छा से नहीं करना चाहिए। साथ यह निर्धारित करता है। कि तुमने जिस कार्य को या जिस लक्ष्य को चुना है। उसे कार्य में जो खामियां या कमियां होती है। उसी की पूर्ति के ही लिये व्यक्ति को प्रॉफिट या लाभ मिलता है। जो स्वयं पर निर्धारित करता है। कि हम इस कार्य या खामियों की पूर्ति करने योग्य है। या नहीं है।


 
        लेखक - रमेशबाबू

रविवार, 8 अक्टूबर 2023

आंखें और शारीरिक मानसिकता अनुभव

वस्तुते मानसिक या शारीरिक ज्ञान को पीछे रखने वाले ज्ञान को समझने के लिए मानवीय शक्ति को नियंत्रित करने के लिए मानसिक या शारीरिक आंखों को नियंत्रित करने का ज्ञान किसी भी चीज को यह हैंडल या चलाने के लिए व्यक्ति सीधे हाथ का प्रयोग करता है। वही प्रक्रिया अगर व्यक्ति आंखें बंद कर या आंखें मूंद कर दोहराने की प्रक्रिया करता है। तो सीधी आंख तरफ गतिमान ज्यादा रहता है जबकि दाएं तरफ घूमने की प्रक्रिया कम रहती है।

कहानी - मतलबी दुनिया

स्वयं पर विश्वास क्यों?

स्वयं पर इतना विश्वास रखो कि तुम जिस कार्य को करने का निश्चय करते हो, उसे पूर्ण करके ही छोड़ो। क्योंकि जीवन में सबसे बड़ी शक्ति ...

कहानी = मतलबी दुनिया नारी विशेष