The process of reflecting seriously on one's life, experiences, actions, and goals, seeking to understand one's life, give it direction, and develop oneself.
Life Thinking
सोमवार, 13 अक्टूबर 2025
कहानी - जीवन एक गलियारा
🌾 कहानी - “मिट्टी की खुशबू में नया जीवन”
🌾 कहानी - “मिट्टी की खुशबू में नया जीवन”
सुमेरपुर नगर में सुखिया नाम का एक कुम्हार अपने छोटे से परिवार के साथ रहता था। उसका जीवन सादगी और परिश्रम से भरा हुआ था। हर सुबह वह मिट्टी खोदने निकल जाता, दोपहर तक चाक पर बर्तन बनाता और शाम को उन्हें सुखाने रख देता। यही उसकी रोज़ी-रोटी थी।
समय के साथ सुखिया बूढ़ा होने लगा, पर उसका बेटा रामू अब जवान और होशियार हो गया था। बाजार में नई तकनीक से बने चमकदार बर्तन आने लगे थे — सस्ते, टिकाऊ और आकर्षक। लोग मिट्टी के बर्तनों की जगह अब धातु और प्लास्टिक के बर्तन खरीदने लगे।
धीरे-धीरे सुखिया का धंधा ठप होने लगा। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया।
एक दिन रामू ने पिता से कहा —
“बाबा, अब ये पुराना तरीका छोड़ दीजिए। मशीनों से बने बर्तन सस्ते पड़ते हैं, हमें भी कुछ नया करना चाहिए।”
सुखिया ने गहरी सांस लेते हुए कहा —
“बेटा, मैं जानता हूँ ज़माना बदल गया है, पर मिट्टी की खुशबू में जो अपनापन है, वह किसी मशीन में नहीं। यह हमारा काम ही नहीं, हमारी पहचान है।”
रामू चुप रहा, लेकिन उसके मन में विचार आने लगे। उसने सोचा — क्यों न इस पुरानी कला को नई पहचान दी जाए?
उसने आधुनिक डिज़ाइन के रंगीन कुल्हड़, सुंदर फूलदान, और मिट्टी के दीये बनाने शुरू किए। फिर उसने इन्हें ऑनलाइन बेचना शुरू किया।
धीरे-धीरे उसके बनाए बर्तनों की मांग बढ़ने लगी। लोग फिर से मिट्टी की ओर लौटने लगे। उन्हें इन बर्तनों में परंपरा और पर्यावरण दोनों की झलक दिखने लगी।
सुखिया गर्व से अपने बेटे को देखता और मुस्कराता —
“देखा बेटा, मिट्टी कभी बेकार नहीं जाती। बस उसे सही सोच और नए हाथ मिल जाएँ, तो वह फिर से सोना बन जाती है।”
लेखक - रमेशबाबू
शनिवार, 11 अक्टूबर 2025
क्या होता- जब स्वयं की मृत्यु कब, क्यों, और कैसे होगी?
जब मनुष्य को यह पता चल जाए कि उसकी मृत्यु कब, क्यों और कैसे होगी, तब उसका जीवन पूरी तरह बदल जाता है। यह ज्ञान उसके सोचने, समझने और जीने के तरीके को गहराई से प्रभावित करता है।
सबसे पहले, मनुष्य के मन में भय और बेचैनी उत्पन्न होती है। मृत्यु का निश्चित समय और कारण जानकर वह हर क्षण उसी की कल्पना में जीने लगता है। उसकी आशाएं, सपने और योजनाएं धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाती हैं, क्योंकि उसे लगता है कि अब सब कुछ समाप्त होने वाला है।A
कुछ लोग ऐसे ज्ञान से आध्यात्मिक रूप से जागरूक हो जाते हैं। वे अपने बचे हुए समय को सार्थक कार्यों में लगाने का निश्चय करते हैं — दूसरों की सेवा, भलाई या आत्मचिंतन में। वे मृत्यु को अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत मानते हैं।
वहीं, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो भय और निराशा के अधीन होकर जीवन से दूर भागने लगते हैं। वे खुशियाँ महसूस नहीं कर पाते, और हर सुख-दुख में उन्हें मृत्यु की छाया दिखाई देती है।A
संक्षेप में कहा जाए तो —
अगर मनुष्य को अपनी मृत्यु का समय, कारण और तरीका पहले से पता हो जाए, तो वह या तो अति विवेकशील और आत्मज्ञानी बन सकता है, या फिर भय और उदासी में डूब सकता है।
यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह उस सत्य को स्वीकार करता है या उससे भागता है।
'' मेरे विचार''
गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025
इच्छाओं की निरंतरता
इच्छाएँ ही मनुष्य को कर्म करने, आगे बढ़ने और सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती हैं, किंतु जब ये इच्छाएँ असीम और अनियंत्रित हो जाती हैं, तब वही इच्छाएँ दुख, असंतोष और तनाव का कारण बन जाती हैं। लालच, ईर्ष्या और प्रतिस्पर्धा इसी असंतुष्ट मन की उपज हैं।q..
यदि मनुष्य अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना सीख ले, आवश्यक और अनावश्यक इच्छाओं के बीच भेद कर सके, तो उसका जीवन कहीं अधिक शांत, संतुलित और सुखमय हो सकता है। सच्चा सुख वस्तुओं की अधिकता में नहीं, बल्कि संतोष में है।q..
इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह अपनी सीमाओं को समझे, जो प्राप्त है उसमें आनंद ढूँढे और अपने कर्म को ही सर्वोच्च मानकर जीवन जीए — तभी वह वास्तविक शांति और आनंद का अनुभव कर सकेगा।
मंगलवार, 7 अक्टूबर 2025
''दीर्घायु का रहस्य धन नहीं, संतुलित जीवन''
वह दिन-रात धन अर्जित करने में लगा रहता है, परंतु यह नहीं सोचता कि यह धन तभी सार्थक है जब शरीर स्वस्थ और मन शांत हो। रुपया-पैसा या धन-दौलत जीवन के क्षणों को वापस नहीं ला सकते। जवानी बीत जाने के बाद पछतावा करने से कुछ भी हासिल नहीं होता।
वास्तव में दीर्घायु का रहस्य केवल लंबा जीवन जीना नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और शांत जीवन जीना है। जो व्यक्ति संयम, नियमित दिनचर्या, सादगी, और सच्चाई से जीवन व्यतीत करता है, वही वास्तव में दीर्घायु कहलाता है।
इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह धन के पीछे भागने के बजाय अपने तन, मन और आत्मा की शुद्धता पर ध्यान दे। क्योंकि जब मन प्रसन्न होता है और शरीर स्वस्थ, तभी जीवन वास्तव में दीर्घ और सुखमय बनता है।
''मेरे विचार''
कहानी - मतलबी दुनिया
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