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Life Thinking

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बुधवार, 27 सितंबर 2023

लघु कहानी - बारिश की आश

पाठ विशेष - रघु को अगर राधा( मां) और श्याम(पिता) उससे ज्यादा लाड प्यार या समय रहते। उसमें सुधार क्या होता तो नहीं तो रघु की मौत होती । नहीं श्याम और नहीं राधा की। कमी कुछ इसमें मां-बाप की शिक्षा देने में होती है। जो की बचपन में समय-समय पर सुधार की जरूरत होती है। स्वयं राधा और श्याम की कमियों साथ ही रघु ने भी लाड प्यार का नाजायज उपयोग कर गलत रास्ते की तरफ चल दिया था। जिससे तीन जिंदगी मौत के काल  में समा गई । आइये - लघु कहानी के माध्यम से विस्तार से समझते हैं।
 
शहर से दूर काली सिंधी नदी के किनारे पहाड़ियों के बीच बस रामपुर नाम का गांव था। लंबे- चौड़े खेत कल्हान पूरी तरह खुशहाल था। इस गांव में राधा और श्याम नाम के दंपति जीवन व्यतीत करते थे। सब कुछ होने के बावजूद नहीं था तो केवल एक वारिस।
मंदिर चढ़ावा, पंडित पुजारी, औझाओ़ आदि। सब किया । किंतु अभी तक संतान नहीं हुई थी। इधर उम्र का पड़ाव भी धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा था। लाक मन्नते करने के बाद एक संतान या उनके घर एक बच्चे का जन्म हुआ। जिसका नाम रघु रखा गया। रघु मां बाप का इकलौता दुलारा था। उसे कोई भी चीज या वस्तु के लिए तरसना नहीं पड़ता था। प्यार दुलार मिलता रहा और इधर मां-बाप की उम्र ढलती गई। किंतु रघु के  शैतानी या शरारत करने पर उसके पिता(श्याम) डांट फटकार लगाते रहते थे। किंतु राधा के प्यार ,दुलार उसे 
पूरी तरह बिगाड़ दिया था। धीरे-धीरे बड़ा होने पर नशा या शराब का आदी हो गया। और आए दिन लड़ाई झगड़ा और दिन प्रतिदिन बिगड़ा ही चला गया। श्याम के बहुत समझाने पर भी उनकी बातों पर कुछ भी ध्यान नहीं दिया । और श्याम राधा को कोसता रहता है कि तुम्हीं ने ही इसको सर पर चढ़ा रखा है। और राधा श्याम को समझाकर कहती है ।कि अभी वह नादान है। जल्दी समझ आ जाएगी । किंतु रघु अपनी शरारतों और लड़ाई झगड़ों से बाज नहीं आ रहा था। कभी दोस्तों के साथ मौज मस्ती, अपनी बाइक की मोटरसाइकिल द्वारा फालतू इधर-उधर घूमना। एक दिन रघु बाजार से शराब में दूत होकर गांव जा रहा था। नशे में कुछ होश नहीं होने से एक ट्राले ने टक्कर मार दिया। और वह घायल होकर वहीं गिर पड़ा। जब यह बात राधा और श्याम को मालूम पड़ी तो बे पास ही के सिटी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। जिससे सर पूरी तरह डैमेज हो चुका था। एक हाथ और एक पर भी टूट चुका था। डॉक्टर द्वारा ना ही जवाब मिला था।या इसके बचने के चांस बहुत कम है। इधर रघु के दिन प्रतिदिन अलग-अलग ऑपरेशन होते रहे। उधर श्याम पैसों का बंदोबस्त कर कर थक चुका था। या लाखों रुपया लगा चुका था ।अपने पास जो पूंजी थी पूरी लगा चुका था। अपनी जमीन भी बेचना पड़ा। किंतु रघु के इलाज में कोई भी फर्क नहीं पड़ा था । और एक दिन राधा और श्याम को अपने जीवन में वह दिन देखना पड़ा जिसे उन्होंने सपनों में नहीं सोचा था। यानी रघु की मौत का राधा रो रो कर बेहोश हो गई। श्याम भी इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सका और दिन प्रतिदिन बीमार होता ही गया। और एक दिन श्याम भी मौत की नींद सो गया। और श्याम के गम में राधा की भी मौत हो गई।

                                    लेखक - रमेशबाबू


गुरुवार, 21 सितंबर 2023

गरीबी या बुरा वक्त कब, क्यों, कैसे? -

मनुष्य अपने जीवन में कार्य या कार्य गति को पूर्ण करने के लिए या अपनी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दबदबा कायम करने के लिए। या सक्षम होने के लिए समय, परिस्थिति के अनुकूल बुद्धि( दिमाग) का उपयोग करता है। लेकिन कुछ कार्या का समय परिस्थिति या दिमाग का गलत इस्तेमाल या अविवेकपूर्ण उपयोग करने पर। गलत परिणाम या कार्य के विपरीत परिणाम मिलता है। जिस व्यक्ति की मानसिक बुद्धि विपरीत दिशा की और कार्य करने लगती है। किसी के समझाने पर भी या कोई दूसरे आदमी के द्वारा सही दिशा या सही ज्ञान देने पर। स्वयं के विपरीत मानकर । अपनी अबुध्दि मन का उपयोग करने लगता है। जिस कार्य, समय, व्यर्थ होते हैं। साथ में ही दिन - प्रतिदिन गरीबी और बुरा वक्त आना भी शुरू हो जाता है। जिससे वह भाग्य और स्वयं को दोस देता रहता है। साथ ही इन सब कारणों के, जिम्मेदार तीन तत्व शामिल होते हैं। क्यों , कैसे और कब ।

🌧️ 1. क्यों आता है गरीबी और बुरा वक्त

गरीबी या बुरा वक्त अचानक नहीं आता, बल्कि यह कई कारणों का परिणाम होता है —

1. कर्मों का परिणाम:
जैसे पेड़ वही फल देता है जो बीज बोया गया हो, वैसे ही मनुष्य के कर्म ही उसके भविष्य का निर्धारण करते हैं। मेहनत, सत्य और संयम से किया गया कर्म सुख लाता है, जबकि आलस्य, अहंकार या गलत रास्ता बुरा वक्त लाता है।


2. परिस्थितियों का खेल:
कभी-कभी व्यक्ति कितना भी परिश्रमी हो, लेकिन समाज, राजनीति या प्राकृतिक विपत्तियाँ (सूखा, महामारी, मंदी) उसकी आर्थिक स्थिति को बिगाड़ देती हैं।


3. अज्ञानता और निर्णयों की गलती:
गलत समय पर गलत निर्णय, जैसे — अनावश्यक खर्च, गलत निवेश, या शिक्षा की कमी — व्यक्ति को धीरे-धीरे गरीबी की ओर ले जाते हैं।
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🕰️ 2. कब आता है बुरा वक्त

बुरा वक्त किसी को चेतावनी दिए बिना आता है, परंतु उसके आने से पहले कुछ संकेत मिलते हैं —

1. जब मनुष्य घमंड में आकर दूसरों की मेहनत को छोटा समझने लगे।


2. जब परिश्रम की जगह भाग्य पर निर्भर हो जाए।


3. जब सही मार्ग छोड़कर आसान लेकिन गलत रास्ते चुनने लगे।


4. जब संबंध, विश्वास और ईमानदारी टूटने लगें।



बुरा वक्त अक्सर तब आता है जब मनुष्य अपने अच्छे वक्त को संभालना भूल जाता है।
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🔄 3. कैसे आता है बुरा वक्त

बुरा वक्त धीरे-धीरे जीवन में प्रवेश करता है —

पहले कमाई घटती है,

फिर खर्च बढ़ते हैं,

उसके बाद लोग साथ छोड़ने लगते हैं,

और अंत में आत्मविश्वास डगमगाने लगता है।


लेकिन यहीं से पुनर्जन्म की शुरुआत होती है।
जो व्यक्ति अपने बुरे वक्त में धैर्य, सच्चाई और मेहनत नहीं छोड़ता —
वही एक दिन ऊँचाइयों पर पहुँचता है।


''मेरी सोच''

लेखक - रमेशबाबू

शनिवार, 16 सितंबर 2023

विध्वंसकारी या स्वयं हितकारी भाषा ज्ञान -

हर मनुष्य भाषा का प्रयोग करते हैं ।जिससे कि दूसरा व्यक्ति उसी ही भाषा के रूप में जवाब दे सके। किंतु मनुष्य को समय ,जगह ,व्यक्ति( स्त्री, पुरुष) की मंशा या परिस्थिति के अनुकूल ही भाषा का प्रयोग करना चाहिए। जिसका अंदाज हम उसके हाब- भाब,  बोल-चाल या उसके चेहरे से पता लगाया जा सकता है। जिससे कि उसकी मानसिकता को आगत या बुरा सुनने को या प्रतिकूल परिणाम न निकले। यदि कोई व्यक्ति मानसिक या शारीरिक या किसी चीज के लिए दुखी अफसोस कर रहा हो। उसी समय अगर अगर दूसरा व्यक्ति खिल्ली या मजाक जनक कष्टदायक भाषा का प्रयोग करता है । है तो उसके मन मस्तिष्क में आगत लगता है ।इसका मतलब है कि- किसी विस्फोटक चीज को रखकर तिल्ली(आग) जलने का काम स्वयं का रहता है। मतलब जानबूझकर आपत्ति मोल लेना है। या स्वयं या दूसरे व्यक्ति से लड़ाई- झगड़ा निश्चित है।
जबकि इसके विपरीत किसी किसी निराश, दुखी व्यक्ति के को मृदु भाषा द्वारा उत्साहित सात्वनां या मदद की जाए तो। उसकी मन बहुत प्रकुल्लित, या डूबते को तिनके का साहरे की जरूरत की तरह काम करता है। किंतु अगर कोई भी व्यक्ति को हम किस भाषा या ज्ञान के द्वारा उसको समझने का प्रयत्न करते हैं। अगर वह क्रोधित या अहंकार का रूप धारण करता है।तो या कोई बात मानने को तैयार नहीं है। तो उसको समझाना बेकार है। जिससे कि स्वयं का समय तथा ज्ञान बहिष्कारी माना जाऐगा।

रविवार, 3 सितंबर 2023

परिवार का मुखिया या स्वयं निर्णायक ( सामाजिक एवं पारिवारिक) - लेख

मनुष्य जीवन में परिवार का मुखिया परिवार को चलाने वाला चालाक एवं इंजन का काम करता है। तथा परिवार रूपी डिब्बे होते हैं 
जिसे चलाने के लिए शारीरिक एवं मानसिक कार्य की प्रक्रिया से परिवार के मुखिया को गुजरना पड़ता है। क्योंकि वह इंजन और चालक दोनों का काम करता है।
बह हमेशा तथा इंजन तथा इंजन से जुड़े डिब्बो को सही दिशा या सही रास्ता दिखाने का कार्य करता है। हमेशा वह आर्थिक एवं सामाजिक परंपरा की स्थितियों का आकलन। या किसी भी स्थिति में धन उपार्जन करना एवं समाज के प्रति जो कार्यों होते हैं उनका का पालन। तथा कठिन परिस्थितियों में स्वयं तथा पारिवारिक सदस्यों को धेर्य बनाकर रखना। जो की हर समय शारीरिक एवं मानसिक कठिनाइयों से होकर गुजरना पड़ता है। जो की एक चुनौतियां पूर्ण जीवन होता हे। जीवन को सही राहे एवं सही दिशा देने के लिऐ। परिवार के सभी सदस्यों से
कोई भी या अन्य कार्य करने से पहले सहमति एवं सही राय लेकर ही कार्य को आगे बढ़ना चाहिए। जिससे कि कार्य को सही दिशा मिल सके। क्योंकि उसमें अलग-अलग आत्मज्ञान का प्रयोग होता है। जो व्यक्ति या जो मुखिया अविवेकपूर्ण या जल्दबाजी में कोई  निर्णय
लेता है। वह कभी भी सफल कार्य को सही रूप नहीं दे पता है । बह स्वयं तथा पारिवारिक लोगों को आर्थिक या सामाजिक स्थिति को गलत मोड़ दे देता है। जिसके चक्रव्यूह से निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है। या आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को हानि पहुंचा देता है।
              
                                  लेखक - रमेश बाबू


गुरुवार, 31 अगस्त 2023

Maa The Great (life biography) -

 प्रकृति का संतुलन बनाने के लिए परमात्मा द्वारा जन्म मृत्यु का अंतराल रखा गया है। या जीव - जंतु में पेड़ - पौधे समय सीमा सुनिश्चित की गई। मनुष्य जीव उत्पत्ति में तीनों अहम भूमिका होती है
1.विधाता   - परमपिता परमात्मा
2. जन्मदात्री- जन्म देने वाली मां
3. जन्मदाता- पालन पोषण करने वाला पिता
परमपिता परमात्मा का अलावा दूसरे स्थान जो आता है वह मां का होता है।
मनुष्य हो या जीव - जंतु लेकिन जो मां होती है। अपने बच्चों के लिए सब कुछ समर्पित करने का भाव या बच्चों की रक्षा हेतु दूसरे मनुष्य या जीव जंतुओं से लड़ने साहस भी रखती है।
जीव उत्पत्ति के बाद में बालक में मां का शब्द का विवरण - जीवात्मा डालने से ही पहले परमात्मा( ब्रह्मदेव) जन्म - मृत्यु, कुल ,कार्य , बिकार आदि विशेषताएं। कब कैसे और क्यों उसकी मृत्यु होगी का लेखा-जोखा जीवात्मा के सामने किया जाता है।
जीवात्मा परमात्मा से सवाल करती है। कि यह परमात्मा जो यह मेरा वजन अपने पेट में रखकर या उसके पेट में लात मार रहा हूं बह  फिर भी अपना कार्य सही रूप से करने वाली कौन है? प्रत्यक्ष रूप से बताइए
परमात्मा - कहते हैं कि यही तेरी मां है जो तेरे को 9 महीने अपने पेट में रखकर रक्त से सिंचित करती रहती है! और तेरे सांसारिक जन्म लेने पर तेरे रोने पर निशतन पान करावेगी । जो तेरे बड़े होने के लिए उपयोगी है। तेरे रोग ग्रस्त होने पर वह सब कुछ न्यौछावर कर देगी।
तेरे पिता - तुझे अपने सीने से लगाकर लाड - प्यार करेगा।
जीवात्मा परमात्मा से फिर सवाल करती है। कि यह पिता क्या होता है।
परमात्मा - तेरे पिता तेरा लालन पोषण प्यार और आर्थिक जरूरत को पूरा करेगा।
है जीवात्मा सांसारिक या मृत्यु लोक में जाने के बाद इंद्रियों के अधीन होकर अपनी मां - पिता को दुखी और निराश मत करना। यही तेरा पहला कर्तव्य है। क्योंकि वे तेरे जन्म से लेकर उनकी मृत्यु तक तेरे लिये शारीरिक एवं मानसिक कठिनाइयों से गुजरते हैं।
और
  गुरु तेरे को सद्मामार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेगा।
जिससे तेरे को जन्म- मरण योनियों से मुक्ति मिल जाएगी।
लेकिन है। यह सब ज्ञान, युक्तियां सतलोक तक ही सीमित है। तेरा मृत्यु लोक में जन्म होने पर यह सब ज्ञान रहस्य वातावरण के अनुसार तू सब कुछ भूल जाऐगा

जीवात्मा- है सृष्टि के स्वामी है मुझे एक कोई ऐसा वरदान दो। कम से कम दो शब्दों का तो ज्ञान दो। जिससे कि मैं बालक रूप मे भूख या कोई शारीरिक कष्ट होने पर किस पुकारू या किसे कहूं यह कैसे कहूं कुछ शब्दों का ज्ञान दो।
परमात्मा - है जीवात्मा तेरे कहना का तात्पर्य भी सही है। तेरे मुंह से जो पहला शब्द निकलेगा। बह मां कहलायेगा।
लेकिन जो आत्माएं यह वरदान नहीं मांगती है। बह जीवन भर  गूंगी ,बेरी रहेगी।

                                      लेखक - रमेशबाबू

कहानी - मतलबी दुनिया

स्वयं पर विश्वास क्यों?

स्वयं पर इतना विश्वास रखो कि तुम जिस कार्य को करने का निश्चय करते हो, उसे पूर्ण करके ही छोड़ो। क्योंकि जीवन में सबसे बड़ी शक्ति ...

कहानी = मतलबी दुनिया नारी विशेष