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शुक्रवार, 29 दिसंबर 2023

प्रभावशाली शब्दों का प्रयोग क्यों कब कैसे?

जीवन मैं उद्देश्यों की प्राप्ति में सफलता अर्जित करने वाले शब्दों को प्रभावशाली शब्द कहते हैं।
जो नकारात्मक ने होकर सकारात्मक भाव से दूसरे व्यक्ति को प्रभावित कर अपनी बात मानने के लिए बाध्य करते हैं।
 तथा समय, व्यक्ति की पहचान भाषा आदि आदि को ध्यान में रखकर एवं जो चीज या जो वस्तु समर्थ है या नहीं।
 श्याम मोहन का दोस्त है। शाम को किसी चीज या वस्तु की आवश्यकता है। किंतु कैसे और कौन से शब्दों का उपयोग करे जिस की मदद मिल सके।  क्योंकि सामान्य शब्दों के प्रयोग से व्यक्ति किसी भी चीज के लिए तुरंत रूप से हां में जवाब नहीं दे सकता। 
जैसे -
1. मेरे को इस चीज(A-z) की जरूरत है। दे दीजिए।( सामान्य शब्द)
2. मेरे को इस चीज(A-z) की जरूरत है कृपया दे दीजिए( मध्य शब्द)
3. प्रिये मेरे को इस चीज(a-z)) की जरूरत है। जो कि तुम्हारे पास है। उसकी मेरे को जरूरत है। आपको समय पर लौटा दूंगा कृपया कर कर मुझे दे दीजिए।( प्रभावशाली शब्द)

 साथ हमें इन सब बातों का ध्यान रखना चाहिए कि जो चीज वस्तु या अन्य बातों से किसी की मदद ले सकते हैं किंतु ध्यान रहे समय से या समय के बीच में देने से दूसरे व्यक्ति में विश्वास जगता है। एवं प्रभावशाली शब्दों की शक्ति दोगुना हो जाती है।

लेखक - रमेश बाबू





गुरुवार, 23 नवंबर 2023

आदी या बर्बादी

आदी - का शब्दार्थ यानी आदत से संबंधित होता है।
एवं मनुष्य अपने जीवन में अपनाते हैं। जो स्थाई रूप से अपने कार्य के रूप में प्रयोग करता है। जो कार्य का भाग ने होकर एक तरह की आदत होती है। एवं शारीरिक मानसिक, आर्थिक, एवं सामाजिक परिस्थितियों का उल्लंघन करती है। जिसे सुनने मात्र से ही दूसरे व्यक्ति को ग्लानि सी महसूस करता है। यह एक तरह की मानसिक स्थिति को घर बना लेती। जिससे उससे निकालना या छोड़ना ना के बराबर होता है। लेकिन नामुमकिन भी नहीं होता। शुरू में तो व्यक्ति दूसरे को देखकर अपने शौक के लिए प्रयोग में लाता है। किंतु धीरे-धीरे उसे चीज का या किसी भी अनुप्रयोग कार्य करने का आदी हो जाता है। जिसको न करने पर या उपयोग में नहीं लाने पर। स्वयं को असंतोषजनक महसूस करता है। लेकिन धीरे-धीरे वह अपने मन मे गिन्न सी महसूस भी करता है। शायद इस कार्य या आदत को अपने जीवन में ने अपनाता या करता।
 
       लेखक - रमेशबाबू

मंगलवार, 21 नवंबर 2023

जीवन की कश्ती मनुष्य पर क्यों हसंती?

जिस तरह व्यक्ति अपने किसी कार्य को सुलभ और आसन बनाने के लिए। उसे नया रूप, रंग, आकर और अपने कार्य के अनुसार उपयोग में लेता है। किंतु कुछ मनुष्य उसमें कुछ खामियां या त्रुटियां का अनुभव नहीं लगा पता है। तथा उसको अपने कार्य के लिए उपयोग में ले लेता है। लेकिन कार्य के दौरान उसे उन कमियों का अनुभव या अंदाज लगता है। जिसे बह तुरंत या जल्दी में उसे कार्य, खामियों की पूर्ति नहीं कर पाता। मन मे यह विचार करता कि शायद में समय रहते इनको ठीक कर पाता । या पहले  ही इन कमियों को देख पाता। लेकिन अब देर बहुत हो चुकी थी।
शायद।
उसी तरह व्यक्ति अपने जीवन में या अपने जीवन में होने वाले कार्य की गलती को समय रहते अगर ठीक नहीं कर पाता है। वर्तमान काल से बुरा भविष्य काल होता है।
इसलिए वर्तमान को भविष्य काल समझकर कार्य को गति देना चाहिए।
 
लेखक -  रमेशबाबू



सोमवार, 20 नवंबर 2023

सृष्टि कर्ता परमात्मा है! तो दृष्टि कर्ता कौन? - आध्यात्मिक ज्ञान

जीवो की उत्पत्ति एवं मृत्यु की काल अवधि के अनुसार उनका चक्र निर्धारित किया गया। किंतु उनके कर्म तथा कार्य को गति प्रदान करने के लिए। विवेक या बुद्धि प्रदान की गई है। जिससे जीव अपने-अपने स्थान पर शरी,र क्षमता, बे बुद्धि के अनुसार कार्य को बढ़ावा देते रहते हैं। या करते रहते हैं। समय चक्र पूर्ण होने पर वह शरीर छोड़ प्रकाश रूपी आत्मा के साथ वापस ब्रह्मलोक लौट जाती है। जिसका पूर्ण निर्माण कर किसी भी रूप शरीर में वापस आत्मा डाल दी जाती है। हम सब यह जानते कि सृष्टि का निर्माण करता ब्रह्मा जी को माना जाता है। या प्राणी जगत निर्माण कर्ता परमात्मा है।

- दृष्टि कर्ता कौन - प्रकृति द्वारा दिए गए शरीर या जीव का निर्माण बिना किसी कारण से नहीं होता।  इस प्रकार  बिना किसी कारण से किसी जीव की मृत्यु हुई नहीं होती है। किंतु जीवन काल पूर्ण किए बिना मृत्यु होना । कुछ हद तक मनुष्य स्वयं भी जिम्मेदार होता है।  बह अपने शरीर की इंद्रियों पर नियंत्रण नहीं होना तथा मनुज तन को गलत उपयोग में लगाना। कहते हैं? कि तन हमारा मंदिर है  तो मन( आत्मा) हमारा भगवान है। जिसकी देख - रेख जिस तरह मनुष्य करना चाहता है।  कर सकता है या बन सकता है। यानी दृष्टि कर्ता मनुष्य स्वयं होता है।

लेखक - रमेशबाबू

मंगलवार, 14 नवंबर 2023

कविता - जिंदगी

                           

                            जीने का सहारा दिखाती है ।जिंदगी

                             दिलों में प्रेम रस बरसाती  है।.....

                             जीने का ढंग से सिखाते है।.....

                             चलने का रास्ता दिखाती है।..... 

   आगामी कल को दिखाती है। जिंदगी  

   सुख -  दुख में साथ निभाती है। .....                 

   घर - आंगन को महकाती है.....

   जीवन में कुछ कर दिखाती है।.....


                            दोस्त नये दुश्मन बनाती है। जिंदगी 

                           अपने को अपनों से लड़ाती हे।.......

                           जीवन में घुल मिल जाती है।........

                          सुख खुश दुख मेआंसू दिखाती है।...


   Ramesh Babu

कहानी - मतलबी दुनिया

स्वयं पर विश्वास क्यों?

स्वयं पर इतना विश्वास रखो कि तुम जिस कार्य को करने का निश्चय करते हो, उसे पूर्ण करके ही छोड़ो। क्योंकि जीवन में सबसे बड़ी शक्ति ...

कहानी = मतलबी दुनिया नारी विशेष